
हल्द्वानी : कुमाऊं में जीएसटी चोरी का खेल एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि टैक्स चोरी करने वाले गुटखा-पान मसाला कारोबारियों के बढ़ते नेटवर्क ने रजिस्टर्ड और नियमित टैक्स अदा करने वाले व्यापारियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के कुछ अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते पिछले तीन महीनों में टैक्स चोरी के कारोबार में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।जानकारी के अनुसार हल्द्वानी, रामनगर और खटीमा के रास्ते पूरे पहाड़ में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का पान मसाला, गुटखा और अन्य खाद्यान्न सामग्री सप्लाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि तीन माह पूर्व हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति के आंकड़ों की तुलना की जाए तो जीएसटी इंफोर्समेंट की कार्यशैली लगभग शून्य नजर आती है।विभाग के ही एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि इस पूरे नेटवर्क को जीएसटी मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। उनका कहना है कि नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के कुछ स्थानीय अधिकारियों को भी इसी संरक्षण का हवाला देकर कार्रवाई से दूर रखा जा रहा है। संबंधित अधिकारी का नाम जल्द सार्वजनिक किए जाने की बात भी कही गई है।सूत्रों का यह भी दावा है कि जीएसटी विभाग को पूरी जानकारी है कि दिल्ली की किन ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिए कुमाऊं के अलग-अलग क्षेत्रों में टैक्स चोरी का सामान पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय अनजान बनने का प्रयास कर रहे हैं।व्यापारियों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले कारोबारियों के लिए बाजार में टिक पाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चाएं इस बात की हैं कि यदि विभाग के उच्चाधिकारियों का अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर नियंत्रण होता तो टैक्स चोरी का यह नेटवर्क इतने खुलेआम सक्रिय नहीं होता।अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जीएसटी चोरी के इस कथित सिंडिकेट पर कार्रवाई कब होगी और विभाग अपने ही अधिकारियों पर लग रहे सांठगांठ के आरोपों की जांच करेगा या नहीं।




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