हल्द्वानी समाचार

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आबकारी विभाग की ‘आंखों पर पट्टी’! शिकायत दो, तभी कार्रवाई करेंगे अधिकारी। शहर में खुलेआम छलकाए जा रहे जाम।

हल्द्वानी: हल्द्वानी शहर में खुलेआम आबकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर ही जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। आबकारी इंस्पेक्टर से लेकर जिला आबकारी अधिकारी और संयुक्त आबकारी आयुक्त तक का रवैया सवालों के घेरे में है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जहां अवैध शराब बिक रही हो या आबकारी मानकों का उल्लंघन हो रहा हो, वहां की “नाम सहित पुख्ता सूचना” दी जाए, तभी कार्रवाई संभव है। हैरानी की बात यह है कि जब कई बार विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। इससे साफ है कि विभाग शिकायत सुनने से ज्यादा उसे टालने में रुचि रखता है। आबकारी इंस्पेक्टर मीनाक्षी टम्टा और जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट का दावा है कि जिले में कहीं भी आबकारी मानकों का उल्लंघन नहीं हो रहा। अगर कहीं हो रहा है तो शिकायतकर्ता खुद मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को जानकारी दे। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किस काम के लिए तैनात हैं? क्या उनका काम सिर्फ दफ्तर में बैठकर शिकायत का इंतजार करना है, या फिर खुद ग्राउंड पर उतरकर कार्रवाई करना भी उनकी जिम्मेदारी है? बीते शनिवार को “हल्द्वानी समाचार” की टीम ने रोडवेज स्थित वर्कशॉप लाइन क्षेत्र में पड़ताल की। शाम होते ही ठेलों, ढाबों और रेस्टोरेंट में खुलेआम शराब परोसी जाती दिखी। लोग सार्वजनिक स्थानों पर जाम छलकाते नजर आए। यही नहीं, तीनपानी बाईपास स्थित अग्निशमन कार्यालय के पास शराब के ठेके के आसपास भी कई ठेलों और रेस्टोरेंट में खुलेआम शराब परोसी जा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां आए दिन शराब पीने के बाद विवाद और हंगामे होते रहते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व में कार्रवाई के दौरान इन्हीं ठेलों को बंद कराया गया था। फिर आखिर किसके संरक्षण में दोबारा यह धंधा शुरू हो गया? क्या विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी हैं, या फिर इसके पीछे कोई मिलीभगत और बाहरी दबाव काम कर रहा है? लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वित्त सचिव के सख्त निर्देश के बाद भी जीएसटी अफसर मौन, कुमाऊं में टैक्स चोरी का ‘सिंडिकेट’ बेखौफ।

हल्द्वानी : कुमाऊं में बढ़ती टैक्स चोरी अब शासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, खाद्यान्न, मोबाइल और ईंट कारोबार में बिना बिल कारोबार और एमआरपी से अधिक वसूली के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने पूरे प्रदेश में टैक्स चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने और जीएसटी कमिश्नर को सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि यदि किसी विभागीय अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि शासन स्तर से कड़े संदेश जारी होने के बावजूद उधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के जिम्मेदार जीएसटी अधिकारी अब तक कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि लगातार शिकायतों और खुलासों के बाद भी विभागीय स्तर पर सख्ती दिखाई नहीं दे रही। सूत्रों के मुताबिक कुमाऊं में टैक्स चोरी का नेटवर्क अब संगठित “सिंडिकेट” का रूप ले चुका है। आरोप हैं कि इस पूरे खेल की कमान रुद्रपुर में तैनात एक जीएसटी अधिकारी के इशारों पर संचालित हो रही है, जिसके संरक्षण में करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है। यही वजह है कि विभागीय टीमों तक शिकायतें पहुंचने के बाद भी कार्रवाई लगभग शून्य बनी हुई है। हल्द्वानी समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट में मंगल पड़ाव, सब्जी मंडी, रामपुर रोड, रेलवे बाजार और टीपी नगर क्षेत्र के व्यापारियों ने दबी जुबान में कई गंभीर आरोप लगाए। व्यापारियों का कहना है कि टैक्स चोरी से जुड़े लोग इतने प्रभावशाली हैं कि उनके खिलाफ बोलने वाले कारोबारियों को डराया और धमकाया जाता है। वित्त सचिव के सख्त रुख और जीएसटी कमिश्नर को दिए गए निर्देशों के बाद अब निगाहें उधम सिंह नगर और नैनीताल के अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या शासन के आदेश सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेंगे या फिर कुमाऊं में सक्रिय टैक्स चोरी के इस कथित सिंडिकेट पर वास्तव में शिकंजा कसेगा।

2000 की बोतल 1400 में! आबकारी विभाग की नाक के नीचे फल-फूल रहा अवैध शराब सिंडिकेट।


हल्द्वानी : शहर में अवैध शराब कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि लाइसेंसी ठेकों पर 2000 रुपए में बिकने वाली बैलेंटिन शराब खुलेआम महज 1400 रुपए में घर-घर पहुंचाई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आबकारी विभाग की आंखों के सामने चल रहे इस खेल पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?सूत्रों के अनुसार बाहरी राज्यों से लाई जा रही शराब शहर में कम कीमत पर धड़ल्ले से बेची जा रही है। इससे न सिर्फ लाइसेंसधारी कारोबारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि राज्य सरकार के राजस्व को भी भारी चपत लग रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय सिर्फ दावे और बयानबाजी तक सीमित

नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जब अवैध शराब बिक्री को लेकर जब जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट और आबकारी इंस्पेक्टर मीनाक्षी टम्टा से सवाल पूछा गया तो उनकी ओर से कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता से ही सबूत, लोकेशन और मौके पर मौजूद रहने की शर्त रखी जाती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर विभाग खुद क्या कर रहा है? क्या आबकारी विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया है? शहर में खुलेआम हो रही होम डिलीवरी और सस्ती शराब की बिक्री ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार चल रहा है? क्या विभाग पर किसी तरह का दबाव है या फिर मिलीभगत के चलते कार्रवाई से बचा जा रहा है? अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग के उच्चाधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हैं या फिर अवैध शराब माफिया इसी तरह सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते रहेंगे।

जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट बोले- जब किसी बार या शराब के ठेके को लेकर शिकायत मिलेगी, तभी की जाएगी कार्रवाई।

अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने को लेकर आबकारी विभाग के अधिकारी बने लाचार।

हल्द्वानी : उत्तराखंड में शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब शहर में खुलेआम बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई और होम डिलीवरी तक की जा रही है। दूसरी तरफ आबकारी विभाग सिर्फ दूरदराज क्षेत्रों में कच्ची शराब के पाउच पकड़कर अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, शहर के कई शराब ठेकों पर रात 11 बजे के बाद भी शटर बंद कर चोरी छिपे डेढ़ से दोगुनी कीमत पर शराब बेची जा रही है। इतना ही नहीं, सुबह निर्धारित समय से पहले भी बैक डोर से शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं। शहर में कम कीमत पर बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई और होम डिलीवरी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। सवाल यह है कि आखिर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा है? क्या आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं, या फिर सबकुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? शहर के कई बारों में आबकारी मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देर रात तक जाम छलक रहे हैं, लेकिन विभागीय टीमें कहीं नजर नहीं आतीं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और बयानबाजी हो रही है। जब इस पूरे मामले पर जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट से बात की गई तो उन्होंने दावा किया कि जिले में कहीं भी नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है। लेकिन जब उनसे देर रात शराब बिक्री, ओवररेटिंग और बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई के लिए शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से ठेके या बार का नाम बताकर सूचना देनी होगी, तभी विभाग कार्रवाई करेगा। इस बयान से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब आबकारी विभाग को किसी बार या ठेके का नाम बताया जाएगा, तभी वह कार्रवाई करेगा। आखिर विभाग की रूटीन चेकिंग और प्रवर्तन टीम अपनी जिम्मेदारी कब निभाएगी। क्या आबकारी विभाग इतना सक्षम भी नहीं है कि वह शहर के शराब के ठेकों और बार में रूटीन चेकिंग कर सके। कहीं न कहीं विभाग के अधिकारी प्रवर्तन कर्रवाई को लेकर लाचार नजर आ रहे हैं या वे किसी तरह का दबाव झेल रहे हैं।

कुमाऊं में टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा—वित्त सचिव सख्त, जीएसटी कमिश्नर को दिया जाएगा कार्रवाई का निर्देश।

हल्द्वानी : उत्तराखंड में टैक्स चोरी के बढ़ते मामलों ने अब शासन स्तर पर हलचल तेज कर दी है। कुमाऊं क्षेत्र में पान मसाला, गुटखा समेत कई सामानों की बिना बिल और एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक्री के खुलासे के बाद वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी कमिश्नर को टैक्स चोरी रोकने के लिए निर्देशित किया जाएगा। टैक्स चोरी पर रोक लगाने और इसमें शामिल लोगों, यहां तक कि विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हल्द्वानी समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि कुमाऊं में टैक्स चोरी का यह खेल संगठित गिरोह के रूप में संचालित हो रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क की कमान रुद्रपुर स्थित एक जीएसटी अधिकारी के हाथ में है। उसके नेतृत्व में पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, ईंट, खाद्यान्न, मोबाइल सहित कई वस्तुओं का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। गंभीर बात यह है कि विभागीय अधिकारियों को जानकारी दिए जाने के बावजूद कार्रवाई न के बराबर हो रही है, जिससे मिलीभगत के आरोप भी लगने लगे हैं। जांच के दौरान हल्द्वानी के मंगल पड़ाव, सब्जी मंडी, रामपुर रोड, रेलवे बाजार और टीपी नगर क्षेत्रों में फुटकर व्यापारियों से बातचीत में भी चौंकाने वाली बातें सामने आईं। व्यापारियों ने दबी आवाज में बताया कि इस अवैध कारोबार से जुड़े लोग बेहद प्रभावशाली और दबंग हैं, जो विरोध करने वालों को धमकाने से भी नहीं हिचकते। पिछले दिसंबर में एक गुटखा कारोबारी और ट्रांसपोर्टर के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज होना इसका उदाहरण बताया जा रहा है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि कुमाऊं मंडल ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में टैक्स चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी कमिश्नर को सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

जीएसटी अधिकारी बना ‘टैक्स माफिया’ का सरगना? रुद्रपुर से चल रहा काले कारोबार का सिंडिकेट, सरकार की छवि पर सवाल!

हल्द्वानी : कुमाऊं क्षेत्र में टैक्स चोरी का खेल अब केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मामला अब विभागीय स्तर तक पहुंचता नजर आ रहा है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुमाऊं में फैले टैक्स चोरी के नेटवर्क का संचालन कथित तौर पर रुद्रपुर से हो रहा है। आरोप है कि इस पूरे सिंडिकेट की कमान एक जीएसटी अधिकारी के हाथ में है। इस अधिकारी को राज्य मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का संरक्षण मिलने की भी चर्चा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, करीब 3-4 महीने पहले तक टैक्स चोरी के मामलों में सख्त कार्रवाई होती थी। रुद्रपुर के एक अधिकारी ने अपने क्षेत्र से बाहर जाकर हल्द्वानी में बिना टैक्स की गाड़ी पकड़कर सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन अब वही अधिकारी पूरी तरह शांत नजर आ रहे हैं। जब जीएसटी इंफोर्समेंट और सचल दल के अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने कथित आरोपियों के बचाव में जवाब दिए।हल्द्वानी के एक जीएसटी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब विभाग में कार्रवाई की इच्छाशक्ति कमजोर पड़ गई है। पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, ईंट, राशन और मोबाइल जैसे सामान बिना टैक्स के खुलेआम बेचे जा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के जरिए यह अवैध कारोबार तराई से पहाड़ तक फैल चुका है। मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को इससे बड़ा झटका लग सकता है। सवाल उठ रहा है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही संरक्षण दें, तो सिस्टम में सुधार कैसे होगा?क्या सरकार इस कथित ‘जीएसटी सिंडिकेट’ पर कोई एक्शन लेगी।

जीएसटी चोर गिरोह” से ईमानदार कारोबारी परेशान! गुटखा-पान मसाला माफिया को अफसरों का संरक्षण देने के आरोप।

हल्द्वानी : कुमाऊं में जीएसटी चोरी का खेल एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि टैक्स चोरी करने वाले गुटखा-पान मसाला कारोबारियों के बढ़ते नेटवर्क ने रजिस्टर्ड और नियमित टैक्स अदा करने वाले व्यापारियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के कुछ अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते पिछले तीन महीनों में टैक्स चोरी के कारोबार में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।जानकारी के अनुसार हल्द्वानी, रामनगर और खटीमा के रास्ते पूरे पहाड़ में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का पान मसाला, गुटखा और अन्य खाद्यान्न सामग्री सप्लाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि तीन माह पूर्व हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति के आंकड़ों की तुलना की जाए तो जीएसटी इंफोर्समेंट की कार्यशैली लगभग शून्य नजर आती है।विभाग के ही एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि इस पूरे नेटवर्क को जीएसटी मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। उनका कहना है कि नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के कुछ स्थानीय अधिकारियों को भी इसी संरक्षण का हवाला देकर कार्रवाई से दूर रखा जा रहा है। संबंधित अधिकारी का नाम जल्द सार्वजनिक किए जाने की बात भी कही गई है।सूत्रों का यह भी दावा है कि जीएसटी विभाग को पूरी जानकारी है कि दिल्ली की किन ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिए कुमाऊं के अलग-अलग क्षेत्रों में टैक्स चोरी का सामान पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय अनजान बनने का प्रयास कर रहे हैं।व्यापारियों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले कारोबारियों के लिए बाजार में टिक पाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चाएं इस बात की हैं कि यदि विभाग के उच्चाधिकारियों का अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर नियंत्रण होता तो टैक्स चोरी का यह नेटवर्क इतने खुलेआम सक्रिय नहीं होता।अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जीएसटी चोरी के इस कथित सिंडिकेट पर कार्रवाई कब होगी और विभाग अपने ही अधिकारियों पर लग रहे सांठगांठ के आरोपों की जांच करेगा या नहीं।

हल्द्वानी समाचार की खबर से टैक्स चोरों में हड़कंप, राज्य कर विभाग में बढ़ी बेचैनी।

हल्द्वानी : शहर में अवैध रूप से चल रहे मसाला-गुटखा कारोबार और जीएसटी चोरी को लेकर हल्द्वानी समाचार में प्रकाशित खबर के बाद कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं दूसरी ओर राज्य कर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि विभाग कार्रवाई के बजाय केवल लीपापोती में जुटा हुआ है। हल्द्वानी समाचार के संवाददाता द्वारा ग्राउंड जीरो पर की गई पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई स्थानों पर मसाला और गुटखा उत्पाद एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं, जबकि अधिकांश बिक्री बिना बिल के की जा रही है। इसे लेकर आम जनता में भारी नाराजगी देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक गोरापड़ाव, ट्रांसपोर्ट नगर और लाइन नंबर-1 से लेकर 17 नंबर तक कई ऐसे गोदाम सक्रिय हैं, जहां प्रतिदिन बड़े पैमाने पर बिना टैक्स चुकाए माल पहुंच रहा है। बताया जा रहा है कि करीब चार माह पूर्व राज्य कर विभाग की सख्ती के चलते भारी मात्रा में माल पकड़ा गया था और संबंधित कारोबारियों से लाखों रुपये का जुर्माना भी वसूला गया था। उस कार्रवाई से राज्य सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि वर्तमान समय में हल्द्वानी में विभाग की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई नजर नहीं आ रही, जिससे कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विभाग की सख्ती अचानक क्यों ठंडी पड़ गई। इधर, काशीपुर में जीएसटी विभाग द्वारा मसाला कारोबारियों के खिलाफ हाल ही में की गई कार्रवाई और लाखों रुपये का जुर्माना वसूलने के बाद हल्द्वानी समाचार द्वारा उठाए गए मुद्दों की सत्यता पर भी मुहर लगती दिखाई दे रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि राज्य कर विभाग हल्द्वानी में सक्रिय अन्य कारोबारियों के खिलाफ कब तक ठोस कार्रवाई करता है या फिर मामला केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा।

विभागीयअधिकारियों के आशीर्वाद से कुमाऊं में धड़ल्ले से चल रहा टैक्स चोरी का काला कारोबार?

हल्द्वानी : उत्तराखंड में गुटखा और पान मसाला कारोबार पर सरकार द्वारा 40 प्रतिशत जीएसटी लागू किए जाने के बाद जहां राजस्व बढ़ने की उम्मीद थी, वहीं अब यही टैक्स व्यवस्था कथित तौर पर टैक्स चोरी माफियाओं के लिए सोने की खान बनती जा रही है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि पहले बिना जीएसटी का माल अंदर लाया जाता है और फिर उसे ब्लैक नेटवर्क के जरिए बाजार में खपाया जा रहा है। इसका सीधा नुकसान सरकार के राजस्व और आम जनता दोनों को उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार कुमाऊं मंडल में कथित रूप से सक्रिय इमरान बेग, जर्मन और सौरभ की तिकड़ी पर विभागीय संरक्षण के गंभीर आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि इस पूरे नेटवर्क को विभागीय अधिकारियों का खुला आशीर्वाद प्राप्त है। यही वजह बताई जा रही है कि टैक्स चोरी से जुड़ा माल बिना किसी रोक-टोक के पूरे कुमाऊं में धड़ल्ले से पहुंच रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये के राजस्व को चूना लगाने वाला यह खेल विभागीय अधिकारियों की नजरों से कैसे बचा हुआ है? क्या विभाग को इन कारोबारियों की गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? हल्द्वानी में तैनात डिप्टी कमिश्नर रजनीश यवस्थी वर्तमान में राज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष पद पर भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब राज्य में राजस्व बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी विभाग की है, तब आखिर कुमाऊं में खुलेआम चल रहे इस कथित नेटवर्क पर अब तक बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सूत्रों का दावा है कि यदि जल्द ही इस “मसाला तिकड़ी” और उनसे जुड़े नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यहित में कई सामाजिक और व्यापारी संगठन एसटीएफ चीफ और आईजी कुमाऊं Ridhim Agarwal से मुलाकात कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे। साथ ही इस कथित अवैध कारोबार में शामिल सभी लोगों को जेल भेजने की मांग भी तेज हो सकती है।

कुमाऊं में टैक्स चोरी का साम्राज्य! गुटखा माफिया की तिकड़ी के आगे जीएसटी विभाग बेबस?


हल्द्वानी : कुमाऊं मंडल में गुटखा-पान मसाला की आड़ में चल रहे करोड़ों रुपये के कथित टैक्स चोरी नेटवर्क ने अब जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली पर ही बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांसपोर्ट नगर हल्द्वानी से लेकर उधम सिंह नगर के रुद्रपुर और काशीपुर तक हर रोज तड़के कथित तौर पर चोरी का माल धड़ल्ले से पहुंच रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग सिर्फ खानापूर्ति करता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक गुटखा-पान मसाला के अवैध कारोबार से जुड़ी चर्चित तिकड़ी जर्मन, इमरान बेग और सौरभ का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि पूरे कुमाऊं में बिना प्रभावी रोक-टोक के माल खपाया जा रहा है। आरोप हैं कि विभागीय कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है, ताकि शासन-प्रशासन और उच्चाधिकारियों का ध्यान असली खेल से हटाया जा सके। बताया जा रहा है कि सुबह-सुबह ट्रकों के जरिए भारी मात्रा में पान मसाला और अन्य सामान कुमाऊं में पहुंचता है, लेकिन विभागीय निगरानी के बावजूद बड़े नेटवर्क तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं पहुंच पा रही। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में माल बिना विभागीय जानकारी के कैसे गुजर रहा है? हल्द्वानी में तैनात डिप्टी कमिश्नर रजनीश यवस्थी राज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में अब विपक्षी और कारोबारी हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इसी वजह से उनके खिलाफ या उनकी कार्यशैली पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही? एक जिम्मेदार पद पर होने के बावजूद टैक्स चोरी रोकने में लगातार विफलता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है। राज्य सरकार को इससे करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि यह नेटवर्क अब केवल गुटखा-पान मसाला तक सीमित नहीं रहा। स्क्रैप, ईंट, खाद्यान्न और अन्य कारोबारों में भी कथित टैक्स चोरी का खेल बड़े स्तर पर फैल चुका है। आरोप हैं कि दिल्ली के कुछ ट्रांसपोर्टरों और विभागीय अफसरों की कथित मिलीभगत से पूरा सिंडिकेट चल रहा है।

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