हल्द्वानी समाचार

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बिजली विभाग की लापरवाही ने जनता को बनाया बंधक, अफसरों के फोन बंद… रातभर पसीने और मच्छरों से जूझते रहे लोग”।

हल्द्वानी : गर्मी बढ़ते ही बिजली विभाग की तैयारियों की पोल खुल गई है। हर साल की तरह इस बार भी विभाग ने गर्मियों से निपटने के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन हकीकत यह है कि शहर और ग्रामीण इलाकों की जनता घंटों की बिजली कटौती से त्राहिमाम कर रही है। हालात इतने बदतर हैं कि लोग रातभर पसीने में भीगकर और मच्छरों के आतंक के बीच जागने को मजबूर हैं, जबकि बिजली विभाग के अधिकारी “सब ठीक है” की नींद सोते नजर आ रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से लगातार बिजली संकट बना हुआ है। घंटों तक बिजली गायब रहने से लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि जब जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। संबंधित एसडीओ को कई बार कॉल किए गए, लेकिन उन्होंने जनता की परेशानी सुनना भी मुनासिब नहीं समझा। इससे साफ है कि विभागीय अफसरों को आम जनता की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं रह गया है। वहीं, ग्रामीण डिवीजन के ईई अजय गुप्ता से जब बिजली गुल होने के कारण पूछे गए तो उन्होंने खुद ही कारण पता लगाने की बात कह दी। सवाल यह है कि अगर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को ही अपने डिवीजन की बिजली व्यवस्था की जानकारी नहीं है, तो आखिर पूरा सिस्टम किस भरोसे चल रहा है? बिजली कटौती ने लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है। लगातार कटौती के कारण लोगों के इनवर्टर जवाब दे रहे हैं। जिन घरों में गैस सिलेंडर नहीं है और खाना बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हों का सहारा लिया जा रहा था, वहां अब चूल्हे तक नहीं जल पा रहे हैं। गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवार भूखे रहने को मजबूर हैं, जबकि सक्षम लोग मजबूरी में होटल और रेस्टोरेंट से महंगा खाना मंगवा रहे हैं। जनता का आरोप है कि बिजली विभाग हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने और व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का दावा करता है, लेकिन जमीनी हकीकत हर बार विभाग की नाकामी और लापरवाही को उजागर कर देती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर जब गर्मियों का मौसम हर साल तय समय पर आता है, तो विभाग पहले से व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं कर पाता?

स्वच्छता समिति पर गंभीर सवाल : सफाई व्यवस्था के नाम पर खेल, निगम कर्मचारियों पर मिलीभगत के आरोप।

हल्द्वानी : शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से गठित नगर निगम की स्वच्छता समिति अब आमजन की सुविधा के बजाय कुछ सफाई नायकों और निगम कर्मचारियों के फायदे का जरिया बनती दिखाई दे रही है। जनता से विभिन्न टैक्सों के रूप में वसूले जा रहे करोड़ों रुपये सरकार द्वारा मूलभूत सफाई व्यवस्था पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन आरोप है कि जमीनी स्तर पर इन पैसों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।सूत्रों के अनुसार स्वच्छता समिति में सफाई कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि निगम कर्मचारियों की मनमानी के चलते एक ही परिवार के कई सदस्यों को सफाई कर्मी के रूप में नियुक्त कर दिया गया, जबकि इनमें से कई कर्मचारी कभी धरातल पर कार्य करते नजर नहीं आते।सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ सफाई नायक कथित रूप से सफाई कर्मियों से काम न करने के बदले खुलेआम पैसे वसूल रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित सफाई निरीक्षक पूरे मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक सफाई कर्मचारी ने बताया कि सफाई नायकों की गतिविधियों की पूरी जानकारी सफाई निरीक्षक को रहती है, लेकिन कार्रवाई के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया जाता है। कर्मचारी का आरोप है कि जो भी सफाई कर्मी नगर आयुक्त से शिकायत करने की कोशिश करता है, उसका ट्रांसफर कर दिया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि शिकायतों और जानकारी के बावजूद कार्रवाई नहीं होना कई संदेह खड़े करता है।अब मामला शहरी विकास विभाग तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रकरण की शिकायत शहरी सचिव डॉ. आर. राजेश से की जाएगी, ताकि नगर निगम की सफाई व्यवस्था और स्वच्छता समिति में चल रही अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो सके।

चार-चार लोग नौकरी पर, सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त वार्ड-8 की महिलाओं का बड़ा आरोप — महीनों से नहीं दिखे सफाई नायक, बेटा करता है मनमानी।

हल्द्वानी : नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वच्छता समिति के तहत नियुक्त किए गए पर्यावरण मित्र जमीनी स्तर पर काम करते नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था चरमराने लगी है। आरोप है कि नगर निगम में रसूखदार कर्मचारियों ने अपने परिवार के कई सदस्यों को स्वच्छता समिति में लगवा रखा है, जिसके चलते कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। वार्ड-8 की कई महिलाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि क्षेत्र में सफाई की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उनका आरोप है कि सफाई नायक राहत मसीह को कई महीनों से इलाके में नहीं देखा गया। जब सफाई कर्मचारियों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि राहत मसीह की जगह उनका बेटा रोहित काम देखता है, जो स्वयं भी स्वच्छता समिति में तैनात है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रोहित सफाई कार्य करने के बजाय अधिकतर समय बैठा रहता है, जबकि कई सफाई कर्मचारी ड्यूटी से गैरहाजिर रहते हैं। लोगों का कहना है कि यदि नियमित रूप से कूड़ा वाहन क्षेत्र में नहीं पहुंचता तो मोहल्ले की स्थिति बदतर हो जाती। स्थानीय लोगों ने नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर भी अनदेखी का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों की ढिलाई के कारण सफाई कर्मचारियों में किसी प्रकार का डर नहीं रह गया है। इतना ही नहीं, क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि सफाई इंस्पेक्टर और सफाई नायकों की मिलीभगत के चलते कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है।

आबकारी विभाग की ‘आंखों पर पट्टी’! शिकायत दो, तभी कार्रवाई करेंगे अधिकारी। शहर में खुलेआम छलकाए जा रहे जाम।

हल्द्वानी: हल्द्वानी शहर में खुलेआम आबकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर ही जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। आबकारी इंस्पेक्टर से लेकर जिला आबकारी अधिकारी और संयुक्त आबकारी आयुक्त तक का रवैया सवालों के घेरे में है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जहां अवैध शराब बिक रही हो या आबकारी मानकों का उल्लंघन हो रहा हो, वहां की “नाम सहित पुख्ता सूचना” दी जाए, तभी कार्रवाई संभव है। हैरानी की बात यह है कि जब कई बार विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। इससे साफ है कि विभाग शिकायत सुनने से ज्यादा उसे टालने में रुचि रखता है। आबकारी इंस्पेक्टर मीनाक्षी टम्टा और जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट का दावा है कि जिले में कहीं भी आबकारी मानकों का उल्लंघन नहीं हो रहा। अगर कहीं हो रहा है तो शिकायतकर्ता खुद मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को जानकारी दे। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किस काम के लिए तैनात हैं? क्या उनका काम सिर्फ दफ्तर में बैठकर शिकायत का इंतजार करना है, या फिर खुद ग्राउंड पर उतरकर कार्रवाई करना भी उनकी जिम्मेदारी है? बीते शनिवार को “हल्द्वानी समाचार” की टीम ने रोडवेज स्थित वर्कशॉप लाइन क्षेत्र में पड़ताल की। शाम होते ही ठेलों, ढाबों और रेस्टोरेंट में खुलेआम शराब परोसी जाती दिखी। लोग सार्वजनिक स्थानों पर जाम छलकाते नजर आए। यही नहीं, तीनपानी बाईपास स्थित अग्निशमन कार्यालय के पास शराब के ठेके के आसपास भी कई ठेलों और रेस्टोरेंट में खुलेआम शराब परोसी जा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां आए दिन शराब पीने के बाद विवाद और हंगामे होते रहते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व में कार्रवाई के दौरान इन्हीं ठेलों को बंद कराया गया था। फिर आखिर किसके संरक्षण में दोबारा यह धंधा शुरू हो गया? क्या विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी हैं, या फिर इसके पीछे कोई मिलीभगत और बाहरी दबाव काम कर रहा है? लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वित्त सचिव के सख्त निर्देश के बाद भी जीएसटी अफसर मौन, कुमाऊं में टैक्स चोरी का ‘सिंडिकेट’ बेखौफ।

हल्द्वानी : कुमाऊं में बढ़ती टैक्स चोरी अब शासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, खाद्यान्न, मोबाइल और ईंट कारोबार में बिना बिल कारोबार और एमआरपी से अधिक वसूली के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने पूरे प्रदेश में टैक्स चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने और जीएसटी कमिश्नर को सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि यदि किसी विभागीय अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि शासन स्तर से कड़े संदेश जारी होने के बावजूद उधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के जिम्मेदार जीएसटी अधिकारी अब तक कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि लगातार शिकायतों और खुलासों के बाद भी विभागीय स्तर पर सख्ती दिखाई नहीं दे रही। सूत्रों के मुताबिक कुमाऊं में टैक्स चोरी का नेटवर्क अब संगठित “सिंडिकेट” का रूप ले चुका है। आरोप हैं कि इस पूरे खेल की कमान रुद्रपुर में तैनात एक जीएसटी अधिकारी के इशारों पर संचालित हो रही है, जिसके संरक्षण में करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है। यही वजह है कि विभागीय टीमों तक शिकायतें पहुंचने के बाद भी कार्रवाई लगभग शून्य बनी हुई है। हल्द्वानी समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट में मंगल पड़ाव, सब्जी मंडी, रामपुर रोड, रेलवे बाजार और टीपी नगर क्षेत्र के व्यापारियों ने दबी जुबान में कई गंभीर आरोप लगाए। व्यापारियों का कहना है कि टैक्स चोरी से जुड़े लोग इतने प्रभावशाली हैं कि उनके खिलाफ बोलने वाले कारोबारियों को डराया और धमकाया जाता है। वित्त सचिव के सख्त रुख और जीएसटी कमिश्नर को दिए गए निर्देशों के बाद अब निगाहें उधम सिंह नगर और नैनीताल के अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या शासन के आदेश सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेंगे या फिर कुमाऊं में सक्रिय टैक्स चोरी के इस कथित सिंडिकेट पर वास्तव में शिकंजा कसेगा।

2000 की बोतल 1400 में! आबकारी विभाग की नाक के नीचे फल-फूल रहा अवैध शराब सिंडिकेट।


हल्द्वानी : शहर में अवैध शराब कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि लाइसेंसी ठेकों पर 2000 रुपए में बिकने वाली बैलेंटिन शराब खुलेआम महज 1400 रुपए में घर-घर पहुंचाई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आबकारी विभाग की आंखों के सामने चल रहे इस खेल पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?सूत्रों के अनुसार बाहरी राज्यों से लाई जा रही शराब शहर में कम कीमत पर धड़ल्ले से बेची जा रही है। इससे न सिर्फ लाइसेंसधारी कारोबारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि राज्य सरकार के राजस्व को भी भारी चपत लग रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय सिर्फ दावे और बयानबाजी तक सीमित

नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जब अवैध शराब बिक्री को लेकर जब जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट और आबकारी इंस्पेक्टर मीनाक्षी टम्टा से सवाल पूछा गया तो उनकी ओर से कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता से ही सबूत, लोकेशन और मौके पर मौजूद रहने की शर्त रखी जाती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर विभाग खुद क्या कर रहा है? क्या आबकारी विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया है? शहर में खुलेआम हो रही होम डिलीवरी और सस्ती शराब की बिक्री ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार चल रहा है? क्या विभाग पर किसी तरह का दबाव है या फिर मिलीभगत के चलते कार्रवाई से बचा जा रहा है? अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग के उच्चाधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हैं या फिर अवैध शराब माफिया इसी तरह सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते रहेंगे।

जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट बोले- जब किसी बार या शराब के ठेके को लेकर शिकायत मिलेगी, तभी की जाएगी कार्रवाई।

अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने को लेकर आबकारी विभाग के अधिकारी बने लाचार।

हल्द्वानी : उत्तराखंड में शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब शहर में खुलेआम बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई और होम डिलीवरी तक की जा रही है। दूसरी तरफ आबकारी विभाग सिर्फ दूरदराज क्षेत्रों में कच्ची शराब के पाउच पकड़कर अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, शहर के कई शराब ठेकों पर रात 11 बजे के बाद भी शटर बंद कर चोरी छिपे डेढ़ से दोगुनी कीमत पर शराब बेची जा रही है। इतना ही नहीं, सुबह निर्धारित समय से पहले भी बैक डोर से शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं। शहर में कम कीमत पर बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई और होम डिलीवरी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। सवाल यह है कि आखिर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा है? क्या आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं, या फिर सबकुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? शहर के कई बारों में आबकारी मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देर रात तक जाम छलक रहे हैं, लेकिन विभागीय टीमें कहीं नजर नहीं आतीं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और बयानबाजी हो रही है। जब इस पूरे मामले पर जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट से बात की गई तो उन्होंने दावा किया कि जिले में कहीं भी नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है। लेकिन जब उनसे देर रात शराब बिक्री, ओवररेटिंग और बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई के लिए शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से ठेके या बार का नाम बताकर सूचना देनी होगी, तभी विभाग कार्रवाई करेगा। इस बयान से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब आबकारी विभाग को किसी बार या ठेके का नाम बताया जाएगा, तभी वह कार्रवाई करेगा। आखिर विभाग की रूटीन चेकिंग और प्रवर्तन टीम अपनी जिम्मेदारी कब निभाएगी। क्या आबकारी विभाग इतना सक्षम भी नहीं है कि वह शहर के शराब के ठेकों और बार में रूटीन चेकिंग कर सके। कहीं न कहीं विभाग के अधिकारी प्रवर्तन कर्रवाई को लेकर लाचार नजर आ रहे हैं या वे किसी तरह का दबाव झेल रहे हैं।

कुमाऊं में टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा—वित्त सचिव सख्त, जीएसटी कमिश्नर को दिया जाएगा कार्रवाई का निर्देश।

हल्द्वानी : उत्तराखंड में टैक्स चोरी के बढ़ते मामलों ने अब शासन स्तर पर हलचल तेज कर दी है। कुमाऊं क्षेत्र में पान मसाला, गुटखा समेत कई सामानों की बिना बिल और एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक्री के खुलासे के बाद वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी कमिश्नर को टैक्स चोरी रोकने के लिए निर्देशित किया जाएगा। टैक्स चोरी पर रोक लगाने और इसमें शामिल लोगों, यहां तक कि विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हल्द्वानी समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि कुमाऊं में टैक्स चोरी का यह खेल संगठित गिरोह के रूप में संचालित हो रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क की कमान रुद्रपुर स्थित एक जीएसटी अधिकारी के हाथ में है। उसके नेतृत्व में पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, ईंट, खाद्यान्न, मोबाइल सहित कई वस्तुओं का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। गंभीर बात यह है कि विभागीय अधिकारियों को जानकारी दिए जाने के बावजूद कार्रवाई न के बराबर हो रही है, जिससे मिलीभगत के आरोप भी लगने लगे हैं। जांच के दौरान हल्द्वानी के मंगल पड़ाव, सब्जी मंडी, रामपुर रोड, रेलवे बाजार और टीपी नगर क्षेत्रों में फुटकर व्यापारियों से बातचीत में भी चौंकाने वाली बातें सामने आईं। व्यापारियों ने दबी आवाज में बताया कि इस अवैध कारोबार से जुड़े लोग बेहद प्रभावशाली और दबंग हैं, जो विरोध करने वालों को धमकाने से भी नहीं हिचकते। पिछले दिसंबर में एक गुटखा कारोबारी और ट्रांसपोर्टर के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज होना इसका उदाहरण बताया जा रहा है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि कुमाऊं मंडल ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में टैक्स चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी कमिश्नर को सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

जीएसटी अधिकारी बना ‘टैक्स माफिया’ का सरगना? रुद्रपुर से चल रहा काले कारोबार का सिंडिकेट, सरकार की छवि पर सवाल!

हल्द्वानी : कुमाऊं क्षेत्र में टैक्स चोरी का खेल अब केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मामला अब विभागीय स्तर तक पहुंचता नजर आ रहा है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुमाऊं में फैले टैक्स चोरी के नेटवर्क का संचालन कथित तौर पर रुद्रपुर से हो रहा है। आरोप है कि इस पूरे सिंडिकेट की कमान एक जीएसटी अधिकारी के हाथ में है। इस अधिकारी को राज्य मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का संरक्षण मिलने की भी चर्चा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, करीब 3-4 महीने पहले तक टैक्स चोरी के मामलों में सख्त कार्रवाई होती थी। रुद्रपुर के एक अधिकारी ने अपने क्षेत्र से बाहर जाकर हल्द्वानी में बिना टैक्स की गाड़ी पकड़कर सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन अब वही अधिकारी पूरी तरह शांत नजर आ रहे हैं। जब जीएसटी इंफोर्समेंट और सचल दल के अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने कथित आरोपियों के बचाव में जवाब दिए।हल्द्वानी के एक जीएसटी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब विभाग में कार्रवाई की इच्छाशक्ति कमजोर पड़ गई है। पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, ईंट, राशन और मोबाइल जैसे सामान बिना टैक्स के खुलेआम बेचे जा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के जरिए यह अवैध कारोबार तराई से पहाड़ तक फैल चुका है। मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को इससे बड़ा झटका लग सकता है। सवाल उठ रहा है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही संरक्षण दें, तो सिस्टम में सुधार कैसे होगा?क्या सरकार इस कथित ‘जीएसटी सिंडिकेट’ पर कोई एक्शन लेगी।

जीएसटी चोर गिरोह” से ईमानदार कारोबारी परेशान! गुटखा-पान मसाला माफिया को अफसरों का संरक्षण देने के आरोप।

हल्द्वानी : कुमाऊं में जीएसटी चोरी का खेल एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि टैक्स चोरी करने वाले गुटखा-पान मसाला कारोबारियों के बढ़ते नेटवर्क ने रजिस्टर्ड और नियमित टैक्स अदा करने वाले व्यापारियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के कुछ अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते पिछले तीन महीनों में टैक्स चोरी के कारोबार में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।जानकारी के अनुसार हल्द्वानी, रामनगर और खटीमा के रास्ते पूरे पहाड़ में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का पान मसाला, गुटखा और अन्य खाद्यान्न सामग्री सप्लाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि तीन माह पूर्व हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति के आंकड़ों की तुलना की जाए तो जीएसटी इंफोर्समेंट की कार्यशैली लगभग शून्य नजर आती है।विभाग के ही एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि इस पूरे नेटवर्क को जीएसटी मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। उनका कहना है कि नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के कुछ स्थानीय अधिकारियों को भी इसी संरक्षण का हवाला देकर कार्रवाई से दूर रखा जा रहा है। संबंधित अधिकारी का नाम जल्द सार्वजनिक किए जाने की बात भी कही गई है।सूत्रों का यह भी दावा है कि जीएसटी विभाग को पूरी जानकारी है कि दिल्ली की किन ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिए कुमाऊं के अलग-अलग क्षेत्रों में टैक्स चोरी का सामान पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय अनजान बनने का प्रयास कर रहे हैं।व्यापारियों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले कारोबारियों के लिए बाजार में टिक पाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चाएं इस बात की हैं कि यदि विभाग के उच्चाधिकारियों का अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर नियंत्रण होता तो टैक्स चोरी का यह नेटवर्क इतने खुलेआम सक्रिय नहीं होता।अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जीएसटी चोरी के इस कथित सिंडिकेट पर कार्रवाई कब होगी और विभाग अपने ही अधिकारियों पर लग रहे सांठगांठ के आरोपों की जांच करेगा या नहीं।

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