
हल्द्वानी : कुमाऊं मंडल में गुटखा-पान मसाला की आड़ में चल रहे करोड़ों रुपये के कथित टैक्स चोरी नेटवर्क ने अब जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली पर ही बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांसपोर्ट नगर हल्द्वानी से लेकर उधम सिंह नगर के रुद्रपुर और काशीपुर तक हर रोज तड़के कथित तौर पर चोरी का माल धड़ल्ले से पहुंच रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग सिर्फ खानापूर्ति करता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक गुटखा-पान मसाला के अवैध कारोबार से जुड़ी चर्चित तिकड़ी जर्मन, इमरान बेग और सौरभ का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि पूरे कुमाऊं में बिना प्रभावी रोक-टोक के माल खपाया जा रहा है। आरोप हैं कि विभागीय कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है, ताकि शासन-प्रशासन और उच्चाधिकारियों का ध्यान असली खेल से हटाया जा सके। बताया जा रहा है कि सुबह-सुबह ट्रकों के जरिए भारी मात्रा में पान मसाला और अन्य सामान कुमाऊं में पहुंचता है, लेकिन विभागीय निगरानी के बावजूद बड़े नेटवर्क तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं पहुंच पा रही। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में माल बिना विभागीय जानकारी के कैसे गुजर रहा है? हल्द्वानी में तैनात डिप्टी कमिश्नर रजनीश यवस्थी राज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में अब विपक्षी और कारोबारी हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इसी वजह से उनके खिलाफ या उनकी कार्यशैली पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही? एक जिम्मेदार पद पर होने के बावजूद टैक्स चोरी रोकने में लगातार विफलता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है। राज्य सरकार को इससे करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि यह नेटवर्क अब केवल गुटखा-पान मसाला तक सीमित नहीं रहा। स्क्रैप, ईंट, खाद्यान्न और अन्य कारोबारों में भी कथित टैक्स चोरी का खेल बड़े स्तर पर फैल चुका है। आरोप हैं कि दिल्ली के कुछ ट्रांसपोर्टरों और विभागीय अफसरों की कथित मिलीभगत से पूरा सिंडिकेट चल रहा है।

हल्द्वानी : देहरादून में देर रात 12:30 बजे तक बार खुले मिलने की घटनाओं ने आबकारी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश की राजधानी, जहां मुख्यमंत्री से लेकर तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहते हैं, वहीं यदि नियमों को खुलेआम धता बताकर शराब परोसी जा रही है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाकी शहरों में हालात कितने बदतर होंगे। प्रदेश में आबकारी नीति सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है। रेस्टोरेंट, ढाबे, सड़क किनारे खोमचे, शादी समारोह और निजी कार्यक्रमों में खुलेआम शराब परोसी जा रही है, लेकिन विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाता दिख रहा है। सवाल यह है कि क्या आबकारी विभाग की जिम्मेदारी केवल छोटे-मोटे देसी पव्वे पकड़कर प्रेस नोट जारी करने तक सीमित रह गई है? हल्द्वानी में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। शहर के ढाबों, रेस्टोरेंटों, निजी आयोजनों और यहां तक कि सड़क किनारे ठेलों पर भी खुलेआम शराब परोसी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों को सबकुछ पता होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती। इससे साफ संकेत मिलता है कि या तो विभाग पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं। शहर में शराब की कथित होम डिलीवरी का नेटवर्क भी तेजी से फैल रहा है। देर रात मोबाइल कॉल पर शराब उपलब्ध कराने की चर्चाएं आम हैं, लेकिन आबकारी विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और मंशा दोनों सवालों के घेरे में हैं। प्रदेश की जनता अब खुलकर सवाल उठाने लगी है कि आखिर आबकारी विभाग का अस्तित्व किस काम का है? लोगों के बीच यह चर्चा तक होने लगी है कि यदि विभाग नियमों का पालन नहीं करा पा रहा तो फिर विभाग को समाप्त कर खुली बिक्री की अनुमति ही दे दी जाए। उत्तराखंड राज्य आंदोलन इसलिए नहीं हुआ था कि शराब माफिया और बेलगाम अफसरशाही प्रदेश की व्यवस्था पर हावी हो जाए। लेकिन मौजूदा हालात यही संकेत दे रहे हैं कि जमीन पर कानून का डर खत्म होता जा रहा है और जिम्मेदार विभाग मौन साधे बैठा है।

हल्द्वानी : सूत्रों के अनुसार कुमाऊं मंडल में गुटखा-तंबाकू कारोबार की आड़ में करोड़ों रुपये के टैक्स चोरी का बड़ा खेल चल रहा है। शहर से लेकर गांव तक गुटखा मसाला खुलेआम एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ जीएसटी चोरी कर माल की सप्लाई धड़ल्ले से जारी है। हैरानी की बात यह है कि पूरा मामला अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक इस पूरे सिंडिकेट को यूपी के चर्चित कारोबारी इमरान बेग, जर्मन और हल्द्वानी के चर्चित सौरभ की तिकड़ी ऑपरेट कर रही है। आरोप है कि बिना टैक्स भुगतान के माल को दिल्ली की ट्रांसपोर्ट कंपनी मणि महेश द्वारा धड़ल्ले से कुमाऊं में खपाया जा रहा है और फिर दुकानदारों के जरिए जनता से एमआरपी से अधिक वसूली की जा रही है। यानी सरकार को टैक्स का नुकसान और जनता की जेब पर डाका—दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अल्मोड़ा में लोगों ने जीएसटी विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पुतला तक फूंक दिया, लेकिन इसके बाद भी विभागीय मशीनरी की नींद नहीं टूटी। अफसरों का खेल : “ये उनका मामला, वो उनका मामला” मामले में जब नैनीताल जिले के ज्वाइंट कमिश्नर रोशन लाल से सवाल किया गया तो उन्होंने जिम्मेदारी जिले के अधिकारियों पर डालते हुए कहा कि टैक्स चोरी रोकने के निर्देश पहले से दिए गए हैं और अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बाहर से आने वाला अधिकतर माल उधम सिंह नगर से होकर आता है, इसलिए वहां के अधिकारियों को भी कार्रवाई करनी चाहिए। दूसरी तरफ उधम सिंह नगर के ज्वाइंट कमिश्नर श्याम सिंह तिरुआ ने भी लगभग वही राग अलापा। उन्होंने कहा कि उनके जिले में भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं और नैनीताल में भी जीएसटी चोरी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जब इस मामले में नैनीताल जिले के डिप्टी कमिश्नर रजनीश यवस्थी से जानकारी लेनी चाही तो कई बार संपर्क करने के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव करना उचित नहीं समझा। सूत्रों के अनुसार राज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष होने के नाते वह कई बार जीएसटी चोरी को लेकर सीधे राज्य जीएसटी आयुक्त से संपर्क करने को कहते हैं।

हल्द्वानी : इन दिनों आबकारी विभाग की कारिस्तानी का नजारा शहर में खूब देखने को मिल रहा है। हालात ऐसे हैं कि विभाग की सरपरस्ती की वजह से अवैध शराब का धंधा खूब फल-फूल रहा है। जिसमें हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों की अवैध शराब की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। साथ ही बड़े-बड़े बारों में आबकारी नियमों के उल्लंघन और ढाबा रेस्टोरेंट में खुलेआम परोसी जा रही शराब पर विभाग अपनी आंखों पर काली पट्टी बांधे हुए है। हैरानी की बात है कि विभाग के अधिकारी चेकिंग और कार्रवाई के नाम पर जंगली क्षेत्र से सटे इलाकों में कच्ची शराब पकड़कर महज खानापूर्ति करने में मशगूल हैं। इधर, आबकारी विभाग के संयुक्त निदेशक केके कांडपाल का दावा है कि जिले के अधिकारियों को अवैध शराब की बिक्री और अन्य आबकारी नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत है कि विभागीय अधिकारी अपने उच्च अधिकारियों की एक सुनने को तयार नहीं हैं। सख्त करवाई और चेकिंग के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।

हल्द्वानी : बद्रीपुरा क्षेत्र में नगर निगम की ओर से डाली जा रही सीवर लाइन ने इलाके की वर्षों पुरानी अव्यवस्था को उजागर कर दिया है। खुदाई के दौरान साफ दिख रहा है कि गलियों की चौड़ाई कहीं ज्यादा तो कहीं बेहद कम है, जिससे पूरे इलाके में यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अनियोजित निर्माण के कारण गलियों की चौड़ाई में कोई एकरूपता नहीं है। कई जगह अतिक्रमण के चलते रास्ते इतने संकरे हो गए हैं कि दो वाहन आमने-सामने आने पर जाम लगना तय है। अब जब सीवर लाइन का काम चल रहा है, तो यह समस्या और ज्यादा स्पष्ट होकर सामने आ गई है।निवासियों का आरोप है कि यदि पहले से ही गलियों की सही माप और चौड़ाई का निर्धारण किया जाता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। लोगों ने मांग की है कि नगर निगम को इस मौके का फायदा उठाते हुए गलियों की वास्तविक चौड़ाई चिन्हित करनी चाहिए और अतिक्रमण हटाकर रास्तों को व्यवस्थित करना चाहिए। फिलहाल सीवर निर्माण कार्य के चलते लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हल्द्वानी : उत्तराखंड में व्यापारी हितों के लिए संघर्षरत संगठनों के बीच प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल ने खुद को राज्य का एकमात्र पंजीकृत और सक्रिय व्यापारी संगठन बताया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष मोंगा ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि उनका संगठन पिछले 40 वर्षों से लगातार व्यापारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाता रहा है और उनके समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन की खासियत यह है कि इसके नेतृत्व में आज भी वे वरिष्ठ व्यापारी शामिल हैं, जिन्होंने स्थापना काल से ही व्यापारी हितों के लिए संघर्ष किया है। मोंगा के अनुसार, शुरुआती दौर में संगठन ने धरना-प्रदर्शन और अनशन जैसे आंदोलनों के जरिए व्यापारियों की आवाज बुलंद की, और यह संघर्ष आज भी जारी है। प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल पूरी तरह गैर-राजनीतिक संगठन है और राज्यभर की इसकी इकाइयाँ वर्तमान में भी व्यापारी एवं जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। सुभाष मोंगा ने राज्य के व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि संगठन हमेशा भ्रष्टाचार और घूसखोरी के खिलाफ खड़ा रहा है और भविष्य में भी बिना किसी समझौते के व्यापारी हितों के लिए संघर्ष करता रहेगा।

हल्द्वानी : नैनीताल जिले में में आबकारी विभाग चैन की नींद सोया हुआ है,जिसकी वजह से शराब माफिया उतराखंड की कई ब्रांडेड शराब को उतराखंड के निर्धारित दामों से कम मूल्यों पर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से लाकर बेखौफ होकर मार्केट में बेच रहे हैं।जिससे राज्य को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, आबकारी विभाग की मिलीभगत के चलते ही सरकारी ठेकों और बार में भी राज्य से बाहर की शराब की खपत हो रही है। उल्लेखनीय है कि बड़े-बड़े रिजॉर्ट, होटल और वैवाहिक कार्यक्रमों में भी माफियाओं द्वारा मुहय्या करवाई जाती है। लेकिन आबकारी विभाग लाचार बनकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसके साथ ही हल्द्वानी के शराब ठेके अपने खुलने और बंद होने के निर्धारित समय से पहले और बाद में चल रहे हैं। जहां एक तरफ जनता को सुबह 9 बजे तक दूध उपलब्ध नहीं हो पाता। वहीं, शहर के लोगों को सुबह सुबह घर में शराब की डिलीवरी हो जाती है। हैरानी की बात है शहर में सप्लाई होने वाली सस्ती शराब हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों से बेधड़क लाई जा रही है। जिस पर आबकारी विभाग अपने आंखें मूंदे हुए है। डीएम साहब के आदेश के बावजूद आबकारी विभाग अपनी मूकदर्शक बना हुआ है। अब देखने वाली बात है कि आबकारी विभाग और जिला आबकारी अधिकारी इस पर कोई सख्त एक्शन लेते हैं या हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं।


हल्द्वानी : नैनीताल जिले में अवैध शराब कारोबार को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रामपुर रोड स्थित एक बार से एक व्यक्ति को स्कूटी के जरिए 192 टेट्रा पैक शराब ले जाते हुए पुलिस ने चेकिंग के दौरान पकड़ा। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह इस शराब को कुसुमखेड़ा क्षेत्र में खुलेआम बेचने के लिए ले जा रहा था। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि शहर में अवैध तरीके से शराब का कारोबार बिना किसी रोक-टोक के फल-फूल रहा है और आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं लग रही। जहां एक ओर पुलिस “ऑपरेशन प्रहार” के तहत लगातार चेकिंग अभियान चलाकर अवैध शराब, चरस और अन्य तस्करी के मामलों का खुलासा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। विभाग की निष्क्रियता के चलते अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं और वे खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।इस पूरे मामले ने नैनीताल जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों में भी इसको लेकर आक्रोश है और वे मांग कर रहे हैं कि इस नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग इस मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। हल्द्वानी समाचार ने पूर्व में अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में शहर में अवैध तरीके से शराब के कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए थे और गली मोहल्लों में अवैध तरीके से शराब की बिक्री के बारे में खुलासा किया था।

हल्द्वानी : जिले में रसोई गैस की लगातार हो रही किल्लत को लेकर अब व्यापारियों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल ने जिला प्रशासन पर सवाल उठाते हुए गैस की कालाबाजारी में लिप्त लोगों को तुरंत जेल भेजने की मांग की है। संगठन के केंद्रीय संयोजक डॉ. धर्म यादव और प्रदेश प्रभारी वीरेंद्र गुप्ता ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार बार-बार यह दावा कर रही है कि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा कि सिर्फ हल्द्वानी ही नहीं बल्कि पूरे नैनीताल जिले में आम जनता गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़ी होने को मजबूर है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा जारी व्यवसायिक सिलेंडरों से संबंधित एसओपी का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। खासतौर पर इंडेन गैस के कर्मचारियों पर मनमानी के आरोप लगाए गए हैं। उनका कहना है कि व्यापारियों को समय पर कॉमर्शियल गैस उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जिससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है।

हल्द्वानी : शहर में संचालित बार, शराब के ठेके और सरकारी कैंटीनों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हालात यह हैं कि कई बारों में बाहरी राज्यों की अवैध शराब धड़ल्ले से परोसी जा रही है, जिससे न सिर्फ राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। इसके अलावा अधिकांश बारों में न तो पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, जिससे कभी भी बड़ी घटना होने की आशंका बनी रहती है। सरकारी शराब कैंटीनों की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। यहां नियमों के विपरीत खुलेआम शराब पिलाई जा रही है, जबकि परिसर में गंदगी का अंबार लगा रहता है। साफ-सफाई की अनदेखी के साथ ही इन कैंटीनों में बेहद निम्न गुणवत्ता का खाने-पीने का सामान बेचा जा रहा है, जो सीधे तौर पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ है। स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब इन सभी अनियमितताओं पर निगरानी रखने वाला आबकारी विभाग पूरी तरह निष्क्रिय नजर आता है। न तो नियमित जांच की जा रही है और न ही औचक निरीक्षण की कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई देती है। बार, ठेकों और कैंटीनों में नियमों की अनदेखी लगातार जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे हुए है।हैरानी की बात है कि शहर के बड़े कारोबारी जो इस तरह के कार्यों में लिप्त हैं, उन रसूखदारों को आबकारी विभाग बखूबी जानता है।