
हल्द्वानी : उत्तराखंड में टैक्स चोरी के बढ़ते मामलों ने अब शासन स्तर पर हलचल तेज कर दी है। कुमाऊं क्षेत्र में पान मसाला, गुटखा समेत कई सामानों की बिना बिल और एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक्री के खुलासे के बाद वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी कमिश्नर को टैक्स चोरी रोकने के लिए निर्देशित किया जाएगा। टैक्स चोरी पर रोक लगाने और इसमें शामिल लोगों, यहां तक कि विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हल्द्वानी समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि कुमाऊं में टैक्स चोरी का यह खेल संगठित गिरोह के रूप में संचालित हो रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क की कमान रुद्रपुर स्थित एक जीएसटी अधिकारी के हाथ में है। उसके नेतृत्व में पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, ईंट, खाद्यान्न, मोबाइल सहित कई वस्तुओं का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। गंभीर बात यह है कि विभागीय अधिकारियों को जानकारी दिए जाने के बावजूद कार्रवाई न के बराबर हो रही है, जिससे मिलीभगत के आरोप भी लगने लगे हैं। जांच के दौरान हल्द्वानी के मंगल पड़ाव, सब्जी मंडी, रामपुर रोड, रेलवे बाजार और टीपी नगर क्षेत्रों में फुटकर व्यापारियों से बातचीत में भी चौंकाने वाली बातें सामने आईं। व्यापारियों ने दबी आवाज में बताया कि इस अवैध कारोबार से जुड़े लोग बेहद प्रभावशाली और दबंग हैं, जो विरोध करने वालों को धमकाने से भी नहीं हिचकते। पिछले दिसंबर में एक गुटखा कारोबारी और ट्रांसपोर्टर के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज होना इसका उदाहरण बताया जा रहा है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि कुमाऊं मंडल ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में टैक्स चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी कमिश्नर को सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

हल्द्वानी : कुमाऊं क्षेत्र में टैक्स चोरी का खेल अब केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मामला अब विभागीय स्तर तक पहुंचता नजर आ रहा है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुमाऊं में फैले टैक्स चोरी के नेटवर्क का संचालन कथित तौर पर रुद्रपुर से हो रहा है। आरोप है कि इस पूरे सिंडिकेट की कमान एक जीएसटी अधिकारी के हाथ में है। इस अधिकारी को राज्य मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का संरक्षण मिलने की भी चर्चा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, करीब 3-4 महीने पहले तक टैक्स चोरी के मामलों में सख्त कार्रवाई होती थी। रुद्रपुर के एक अधिकारी ने अपने क्षेत्र से बाहर जाकर हल्द्वानी में बिना टैक्स की गाड़ी पकड़कर सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन अब वही अधिकारी पूरी तरह शांत नजर आ रहे हैं। जब जीएसटी इंफोर्समेंट और सचल दल के अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने कथित आरोपियों के बचाव में जवाब दिए।हल्द्वानी के एक जीएसटी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब विभाग में कार्रवाई की इच्छाशक्ति कमजोर पड़ गई है। पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, ईंट, राशन और मोबाइल जैसे सामान बिना टैक्स के खुलेआम बेचे जा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के जरिए यह अवैध कारोबार तराई से पहाड़ तक फैल चुका है। मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को इससे बड़ा झटका लग सकता है। सवाल उठ रहा है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही संरक्षण दें, तो सिस्टम में सुधार कैसे होगा?क्या सरकार इस कथित ‘जीएसटी सिंडिकेट’ पर कोई एक्शन लेगी।

हल्द्वानी : कुमाऊं में जीएसटी चोरी का खेल एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि टैक्स चोरी करने वाले गुटखा-पान मसाला कारोबारियों के बढ़ते नेटवर्क ने रजिस्टर्ड और नियमित टैक्स अदा करने वाले व्यापारियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के कुछ अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते पिछले तीन महीनों में टैक्स चोरी के कारोबार में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।जानकारी के अनुसार हल्द्वानी, रामनगर और खटीमा के रास्ते पूरे पहाड़ में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का पान मसाला, गुटखा और अन्य खाद्यान्न सामग्री सप्लाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि तीन माह पूर्व हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति के आंकड़ों की तुलना की जाए तो जीएसटी इंफोर्समेंट की कार्यशैली लगभग शून्य नजर आती है।विभाग के ही एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि इस पूरे नेटवर्क को जीएसटी मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। उनका कहना है कि नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के कुछ स्थानीय अधिकारियों को भी इसी संरक्षण का हवाला देकर कार्रवाई से दूर रखा जा रहा है। संबंधित अधिकारी का नाम जल्द सार्वजनिक किए जाने की बात भी कही गई है।सूत्रों का यह भी दावा है कि जीएसटी विभाग को पूरी जानकारी है कि दिल्ली की किन ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिए कुमाऊं के अलग-अलग क्षेत्रों में टैक्स चोरी का सामान पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय अनजान बनने का प्रयास कर रहे हैं।व्यापारियों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले कारोबारियों के लिए बाजार में टिक पाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चाएं इस बात की हैं कि यदि विभाग के उच्चाधिकारियों का अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर नियंत्रण होता तो टैक्स चोरी का यह नेटवर्क इतने खुलेआम सक्रिय नहीं होता।अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जीएसटी चोरी के इस कथित सिंडिकेट पर कार्रवाई कब होगी और विभाग अपने ही अधिकारियों पर लग रहे सांठगांठ के आरोपों की जांच करेगा या नहीं।

हल्द्वानी : शहर में अवैध रूप से चल रहे मसाला-गुटखा कारोबार और जीएसटी चोरी को लेकर हल्द्वानी समाचार में प्रकाशित खबर के बाद कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं दूसरी ओर राज्य कर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि विभाग कार्रवाई के बजाय केवल लीपापोती में जुटा हुआ है। हल्द्वानी समाचार के संवाददाता द्वारा ग्राउंड जीरो पर की गई पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई स्थानों पर मसाला और गुटखा उत्पाद एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं, जबकि अधिकांश बिक्री बिना बिल के की जा रही है। इसे लेकर आम जनता में भारी नाराजगी देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक गोरापड़ाव, ट्रांसपोर्ट नगर और लाइन नंबर-1 से लेकर 17 नंबर तक कई ऐसे गोदाम सक्रिय हैं, जहां प्रतिदिन बड़े पैमाने पर बिना टैक्स चुकाए माल पहुंच रहा है। बताया जा रहा है कि करीब चार माह पूर्व राज्य कर विभाग की सख्ती के चलते भारी मात्रा में माल पकड़ा गया था और संबंधित कारोबारियों से लाखों रुपये का जुर्माना भी वसूला गया था। उस कार्रवाई से राज्य सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि वर्तमान समय में हल्द्वानी में विभाग की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई नजर नहीं आ रही, जिससे कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विभाग की सख्ती अचानक क्यों ठंडी पड़ गई। इधर, काशीपुर में जीएसटी विभाग द्वारा मसाला कारोबारियों के खिलाफ हाल ही में की गई कार्रवाई और लाखों रुपये का जुर्माना वसूलने के बाद हल्द्वानी समाचार द्वारा उठाए गए मुद्दों की सत्यता पर भी मुहर लगती दिखाई दे रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि राज्य कर विभाग हल्द्वानी में सक्रिय अन्य कारोबारियों के खिलाफ कब तक ठोस कार्रवाई करता है या फिर मामला केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा।

हल्द्वानी : उत्तराखंड में गुटखा और पान मसाला कारोबार पर सरकार द्वारा 40 प्रतिशत जीएसटी लागू किए जाने के बाद जहां राजस्व बढ़ने की उम्मीद थी, वहीं अब यही टैक्स व्यवस्था कथित तौर पर टैक्स चोरी माफियाओं के लिए सोने की खान बनती जा रही है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि पहले बिना जीएसटी का माल अंदर लाया जाता है और फिर उसे ब्लैक नेटवर्क के जरिए बाजार में खपाया जा रहा है। इसका सीधा नुकसान सरकार के राजस्व और आम जनता दोनों को उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार कुमाऊं मंडल में कथित रूप से सक्रिय इमरान बेग, जर्मन और सौरभ की तिकड़ी पर विभागीय संरक्षण के गंभीर आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि इस पूरे नेटवर्क को विभागीय अधिकारियों का खुला आशीर्वाद प्राप्त है। यही वजह बताई जा रही है कि टैक्स चोरी से जुड़ा माल बिना किसी रोक-टोक के पूरे कुमाऊं में धड़ल्ले से पहुंच रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये के राजस्व को चूना लगाने वाला यह खेल विभागीय अधिकारियों की नजरों से कैसे बचा हुआ है? क्या विभाग को इन कारोबारियों की गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? हल्द्वानी में तैनात डिप्टी कमिश्नर रजनीश यवस्थी वर्तमान में राज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष पद पर भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब राज्य में राजस्व बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी विभाग की है, तब आखिर कुमाऊं में खुलेआम चल रहे इस कथित नेटवर्क पर अब तक बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सूत्रों का दावा है कि यदि जल्द ही इस “मसाला तिकड़ी” और उनसे जुड़े नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यहित में कई सामाजिक और व्यापारी संगठन एसटीएफ चीफ और आईजी कुमाऊं Ridhim Agarwal से मुलाकात कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे। साथ ही इस कथित अवैध कारोबार में शामिल सभी लोगों को जेल भेजने की मांग भी तेज हो सकती है।

हल्द्वानी : कुमाऊं मंडल में गुटखा-पान मसाला की आड़ में चल रहे करोड़ों रुपये के कथित टैक्स चोरी नेटवर्क ने अब जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली पर ही बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांसपोर्ट नगर हल्द्वानी से लेकर उधम सिंह नगर के रुद्रपुर और काशीपुर तक हर रोज तड़के कथित तौर पर चोरी का माल धड़ल्ले से पहुंच रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग सिर्फ खानापूर्ति करता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक गुटखा-पान मसाला के अवैध कारोबार से जुड़ी चर्चित तिकड़ी जर्मन, इमरान बेग और सौरभ का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि पूरे कुमाऊं में बिना प्रभावी रोक-टोक के माल खपाया जा रहा है। आरोप हैं कि विभागीय कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है, ताकि शासन-प्रशासन और उच्चाधिकारियों का ध्यान असली खेल से हटाया जा सके। बताया जा रहा है कि सुबह-सुबह ट्रकों के जरिए भारी मात्रा में पान मसाला और अन्य सामान कुमाऊं में पहुंचता है, लेकिन विभागीय निगरानी के बावजूद बड़े नेटवर्क तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं पहुंच पा रही। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में माल बिना विभागीय जानकारी के कैसे गुजर रहा है? हल्द्वानी में तैनात डिप्टी कमिश्नर रजनीश यवस्थी राज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में अब विपक्षी और कारोबारी हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इसी वजह से उनके खिलाफ या उनकी कार्यशैली पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही? एक जिम्मेदार पद पर होने के बावजूद टैक्स चोरी रोकने में लगातार विफलता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है। राज्य सरकार को इससे करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि यह नेटवर्क अब केवल गुटखा-पान मसाला तक सीमित नहीं रहा। स्क्रैप, ईंट, खाद्यान्न और अन्य कारोबारों में भी कथित टैक्स चोरी का खेल बड़े स्तर पर फैल चुका है। आरोप हैं कि दिल्ली के कुछ ट्रांसपोर्टरों और विभागीय अफसरों की कथित मिलीभगत से पूरा सिंडिकेट चल रहा है।

हल्द्वानी : देहरादून में देर रात 12:30 बजे तक बार खुले मिलने की घटनाओं ने आबकारी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश की राजधानी, जहां मुख्यमंत्री से लेकर तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहते हैं, वहीं यदि नियमों को खुलेआम धता बताकर शराब परोसी जा रही है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाकी शहरों में हालात कितने बदतर होंगे। प्रदेश में आबकारी नीति सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है। रेस्टोरेंट, ढाबे, सड़क किनारे खोमचे, शादी समारोह और निजी कार्यक्रमों में खुलेआम शराब परोसी जा रही है, लेकिन विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाता दिख रहा है। सवाल यह है कि क्या आबकारी विभाग की जिम्मेदारी केवल छोटे-मोटे देसी पव्वे पकड़कर प्रेस नोट जारी करने तक सीमित रह गई है? हल्द्वानी में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। शहर के ढाबों, रेस्टोरेंटों, निजी आयोजनों और यहां तक कि सड़क किनारे ठेलों पर भी खुलेआम शराब परोसी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों को सबकुछ पता होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती। इससे साफ संकेत मिलता है कि या तो विभाग पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं। शहर में शराब की कथित होम डिलीवरी का नेटवर्क भी तेजी से फैल रहा है। देर रात मोबाइल कॉल पर शराब उपलब्ध कराने की चर्चाएं आम हैं, लेकिन आबकारी विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और मंशा दोनों सवालों के घेरे में हैं। प्रदेश की जनता अब खुलकर सवाल उठाने लगी है कि आखिर आबकारी विभाग का अस्तित्व किस काम का है? लोगों के बीच यह चर्चा तक होने लगी है कि यदि विभाग नियमों का पालन नहीं करा पा रहा तो फिर विभाग को समाप्त कर खुली बिक्री की अनुमति ही दे दी जाए। उत्तराखंड राज्य आंदोलन इसलिए नहीं हुआ था कि शराब माफिया और बेलगाम अफसरशाही प्रदेश की व्यवस्था पर हावी हो जाए। लेकिन मौजूदा हालात यही संकेत दे रहे हैं कि जमीन पर कानून का डर खत्म होता जा रहा है और जिम्मेदार विभाग मौन साधे बैठा है।

हल्द्वानी : सूत्रों के अनुसार कुमाऊं मंडल में गुटखा-तंबाकू कारोबार की आड़ में करोड़ों रुपये के टैक्स चोरी का बड़ा खेल चल रहा है। शहर से लेकर गांव तक गुटखा मसाला खुलेआम एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ जीएसटी चोरी कर माल की सप्लाई धड़ल्ले से जारी है। हैरानी की बात यह है कि पूरा मामला अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक इस पूरे सिंडिकेट को यूपी के चर्चित कारोबारी इमरान बेग, जर्मन और हल्द्वानी के चर्चित सौरभ की तिकड़ी ऑपरेट कर रही है। आरोप है कि बिना टैक्स भुगतान के माल को दिल्ली की ट्रांसपोर्ट कंपनी मणि महेश द्वारा धड़ल्ले से कुमाऊं में खपाया जा रहा है और फिर दुकानदारों के जरिए जनता से एमआरपी से अधिक वसूली की जा रही है। यानी सरकार को टैक्स का नुकसान और जनता की जेब पर डाका—दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अल्मोड़ा में लोगों ने जीएसटी विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पुतला तक फूंक दिया, लेकिन इसके बाद भी विभागीय मशीनरी की नींद नहीं टूटी। अफसरों का खेल : “ये उनका मामला, वो उनका मामला” मामले में जब नैनीताल जिले के ज्वाइंट कमिश्नर रोशन लाल से सवाल किया गया तो उन्होंने जिम्मेदारी जिले के अधिकारियों पर डालते हुए कहा कि टैक्स चोरी रोकने के निर्देश पहले से दिए गए हैं और अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बाहर से आने वाला अधिकतर माल उधम सिंह नगर से होकर आता है, इसलिए वहां के अधिकारियों को भी कार्रवाई करनी चाहिए। दूसरी तरफ उधम सिंह नगर के ज्वाइंट कमिश्नर श्याम सिंह तिरुआ ने भी लगभग वही राग अलापा। उन्होंने कहा कि उनके जिले में भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं और नैनीताल में भी जीएसटी चोरी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जब इस मामले में नैनीताल जिले के डिप्टी कमिश्नर रजनीश यवस्थी से जानकारी लेनी चाही तो कई बार संपर्क करने के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव करना उचित नहीं समझा। सूत्रों के अनुसार राज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष होने के नाते वह कई बार जीएसटी चोरी को लेकर सीधे राज्य जीएसटी आयुक्त से संपर्क करने को कहते हैं।

हल्द्वानी : इन दिनों आबकारी विभाग की कारिस्तानी का नजारा शहर में खूब देखने को मिल रहा है। हालात ऐसे हैं कि विभाग की सरपरस्ती की वजह से अवैध शराब का धंधा खूब फल-फूल रहा है। जिसमें हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों की अवैध शराब की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। साथ ही बड़े-बड़े बारों में आबकारी नियमों के उल्लंघन और ढाबा रेस्टोरेंट में खुलेआम परोसी जा रही शराब पर विभाग अपनी आंखों पर काली पट्टी बांधे हुए है। हैरानी की बात है कि विभाग के अधिकारी चेकिंग और कार्रवाई के नाम पर जंगली क्षेत्र से सटे इलाकों में कच्ची शराब पकड़कर महज खानापूर्ति करने में मशगूल हैं। इधर, आबकारी विभाग के संयुक्त निदेशक केके कांडपाल का दावा है कि जिले के अधिकारियों को अवैध शराब की बिक्री और अन्य आबकारी नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत है कि विभागीय अधिकारी अपने उच्च अधिकारियों की एक सुनने को तयार नहीं हैं। सख्त करवाई और चेकिंग के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।

हल्द्वानी : बद्रीपुरा क्षेत्र में नगर निगम की ओर से डाली जा रही सीवर लाइन ने इलाके की वर्षों पुरानी अव्यवस्था को उजागर कर दिया है। खुदाई के दौरान साफ दिख रहा है कि गलियों की चौड़ाई कहीं ज्यादा तो कहीं बेहद कम है, जिससे पूरे इलाके में यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अनियोजित निर्माण के कारण गलियों की चौड़ाई में कोई एकरूपता नहीं है। कई जगह अतिक्रमण के चलते रास्ते इतने संकरे हो गए हैं कि दो वाहन आमने-सामने आने पर जाम लगना तय है। अब जब सीवर लाइन का काम चल रहा है, तो यह समस्या और ज्यादा स्पष्ट होकर सामने आ गई है।निवासियों का आरोप है कि यदि पहले से ही गलियों की सही माप और चौड़ाई का निर्धारण किया जाता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। लोगों ने मांग की है कि नगर निगम को इस मौके का फायदा उठाते हुए गलियों की वास्तविक चौड़ाई चिन्हित करनी चाहिए और अतिक्रमण हटाकर रास्तों को व्यवस्थित करना चाहिए। फिलहाल सीवर निर्माण कार्य के चलते लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।