
हल्द्वानी : उत्तराखंड में गुटखा और पान मसाला कारोबार पर सरकार द्वारा 40 प्रतिशत जीएसटी लागू किए जाने के बाद जहां राजस्व बढ़ने की उम्मीद थी, वहीं अब यही टैक्स व्यवस्था कथित तौर पर टैक्स चोरी माफियाओं के लिए सोने की खान बनती जा रही है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि पहले बिना जीएसटी का माल अंदर लाया जाता है और फिर उसे ब्लैक नेटवर्क के जरिए बाजार में खपाया जा रहा है। इसका सीधा नुकसान सरकार के राजस्व और आम जनता दोनों को उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार कुमाऊं मंडल में कथित रूप से सक्रिय इमरान बेग, जर्मन और सौरभ की तिकड़ी पर विभागीय संरक्षण के गंभीर आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि इस पूरे नेटवर्क को विभागीय अधिकारियों का खुला आशीर्वाद प्राप्त है। यही वजह बताई जा रही है कि टैक्स चोरी से जुड़ा माल बिना किसी रोक-टोक के पूरे कुमाऊं में धड़ल्ले से पहुंच रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये के राजस्व को चूना लगाने वाला यह खेल विभागीय अधिकारियों की नजरों से कैसे बचा हुआ है? क्या विभाग को इन कारोबारियों की गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? हल्द्वानी में तैनात डिप्टी कमिश्नर रजनीश यवस्थी वर्तमान में राज्य कर सेवा संघ के अध्यक्ष पद पर भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब राज्य में राजस्व बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी विभाग की है, तब आखिर कुमाऊं में खुलेआम चल रहे इस कथित नेटवर्क पर अब तक बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सूत्रों का दावा है कि यदि जल्द ही इस “मसाला तिकड़ी” और उनसे जुड़े नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यहित में कई सामाजिक और व्यापारी संगठन एसटीएफ चीफ और आईजी कुमाऊं Ridhim Agarwal से मुलाकात कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे। साथ ही इस कथित अवैध कारोबार में शामिल सभी लोगों को जेल भेजने की मांग भी तेज हो सकती है।




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