
हल्द्वानी: हल्द्वानी शहर में खुलेआम आबकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर ही जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। आबकारी इंस्पेक्टर से लेकर जिला आबकारी अधिकारी और संयुक्त आबकारी आयुक्त तक का रवैया सवालों के घेरे में है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जहां अवैध शराब बिक रही हो या आबकारी मानकों का उल्लंघन हो रहा हो, वहां की “नाम सहित पुख्ता सूचना” दी जाए, तभी कार्रवाई संभव है। हैरानी की बात यह है कि जब कई बार विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। इससे साफ है कि विभाग शिकायत सुनने से ज्यादा उसे टालने में रुचि रखता है। आबकारी इंस्पेक्टर मीनाक्षी टम्टा और जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट का दावा है कि जिले में कहीं भी आबकारी मानकों का उल्लंघन नहीं हो रहा। अगर कहीं हो रहा है तो शिकायतकर्ता खुद मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को जानकारी दे। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किस काम के लिए तैनात हैं? क्या उनका काम सिर्फ दफ्तर में बैठकर शिकायत का इंतजार करना है, या फिर खुद ग्राउंड पर उतरकर कार्रवाई करना भी उनकी जिम्मेदारी है? बीते शनिवार को “हल्द्वानी समाचार” की टीम ने रोडवेज स्थित वर्कशॉप लाइन क्षेत्र में पड़ताल की। शाम होते ही ठेलों, ढाबों और रेस्टोरेंट में खुलेआम शराब परोसी जाती दिखी। लोग सार्वजनिक स्थानों पर जाम छलकाते नजर आए। यही नहीं, तीनपानी बाईपास स्थित अग्निशमन कार्यालय के पास शराब के ठेके के आसपास भी कई ठेलों और रेस्टोरेंट में खुलेआम शराब परोसी जा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां आए दिन शराब पीने के बाद विवाद और हंगामे होते रहते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व में कार्रवाई के दौरान इन्हीं ठेलों को बंद कराया गया था। फिर आखिर किसके संरक्षण में दोबारा यह धंधा शुरू हो गया? क्या विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी हैं, या फिर इसके पीछे कोई मिलीभगत और बाहरी दबाव काम कर रहा है? लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




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