हल्द्वानी समाचार

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मुखानी से मंडी-तीनपानी बाईपास तक शराब ठेकों पर ओवररेटिंग के आरोप, वर्कर बोले- कहीं भी शिकायत कर लो, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा।अतिरिक्त रकम अधिकारियों और संचालक तक पहुंचाने का आरोप। विरोध पर ग्राहकों को धमकी।

हल्द्वानी समाचार : शहर में शराब की दुकानों पर एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप है कि कई शराब ठेकों पर निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दाम पर शराब बेची जा रही है। ग्राहक जब ओवररेटिंग का विरोध करते हैं तो उनसे अभद्रता और कथित तौर पर धमकी तक दी जाती है। क्रियाशाला रोड स्थित मुखानी के पास शराब की दुकान को लेकर ग्राहकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यहां शराब की बोतलों पर अंकित एमआरपी से अधिक कीमत वसूली जाती है। ग्राहक जब अतिरिक्त रकम लेने का कारण पूछते हैं या निर्धारित रेट पर शराब देने की मांग करते हैं तो दुकान के कर्मचारी कथित तौर पर कहते हैं कि कहीं भी शिकायत कर लो, उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा और शराब ऊंची कीमत पर ही मिलेगी।
इसी तरह मंडी-तीनपानी बाईपास स्थित शराब के ठेके पर भी एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्राहकों का आरोप है कि यहां भी बोतल पर दर्ज कीमत से अधिक रकम वसूली जा रही है। विरोध करने पर ग्राहकों को संतोषजनक जवाब देने के बजाय कथित तौर पर टालने या दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है।

अतिरिक्त रकम अधिकारियों और संचालक तक पहुंचाने का दावा ग्राहकों के मुताबिक, अतिरिक्त रकम वसूलने का कारण पूछने पर दुकान में काम करने वाले कर्मचारी कथित तौर पर दावा करते हैं कि एमआरपी से ऊपर लिया जा रहा पैसा विभागीय अधिकारियों और ठेका संचालक को दिया जाता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। शहर के अलग-अलग शराब ठेकों से लगातार ओवररेटिंग की शिकायतें सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि शराब दुकानों पर नियमित जांच और बिलिंग व्यवस्था की सख्ती से निगरानी हो तो एमआरपी से अधिक वसूली पर रोक लग सकती है। ग्राहकों ने आबकारी विभाग से मुखानी और मंडी-तीनपानी बाईपास समेत शहर के सभी शराब ठेकों की जांच कराने, एमआरपी से अधिक वसूली की शिकायतों का सत्यापन करने और ग्राहकों से अभद्रता या धमकी देने के आरोपों पर कार्रवाई की मांग की है। इधर, जिला आबकारी अधिकारी धीरेन्द्र बिष्ट हर बार कार्रवाई का दावा करते हैं, लेकिन आज तक कोई जमीनी कार्रवाई देखने को नहीं मिली।

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