हल्द्वानी समाचार

आपका शहर, आपकी खबर, आपकी आवाज़!

ज्योलीकोट में जलजनित संक्रमण का कहर, दो जिंदगियां खत्म। डायरिया-टायफाइड के बाद पीलिया ने मचाई तबाही, 16 वर्षीय छात्र और दो मासूम बेटियों की मां की मौत; एक ही परिवार के पांच सदस्य भी बीमार।

हल्द्वानी समाचार : ज्योलीकोट क्षेत्र में जून के अंतिम सप्ताह से पैर पसार रहा जलजनित संक्रमण अब गंभीर संकट का रूप ले चुका है। शुरुआत डायरिया और उल्टी-दस्त से हुई, जिसके बाद टायफाइड के मामले सामने आए और अब पीलिया ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीती रात इस संक्रमण की चपेट में आए दो लोगों की मौत हो गई। इनमें सरियाताल का 16 वर्षीय मेधावी छात्र रितेश जीना और ज्योलीकोट की 26 वर्षीय नीमा जोशी शामिल हैं। लगातार सामने आ रहे मामलों और दो मौतों के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वहीं, बीमारी के बढ़ते प्रकोप ने पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरियाताल निवासी 16 वर्षीय रितेश जीना, पुत्र उमेश्वर सिंह, को 18 अगस्त से टायफाइड के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत थी। स्थानीय स्तर पर उपचार के बावजूद 28 अगस्त को उसकी हालत अचानक गंभीर हो गई। परिजन उसे हल्द्वानी के कई निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे। बताया गया कि संक्रमण बढ़ने के कारण रितेश का लिवर प्रभावित होने के साथ फेफड़ों और किडनी पर भी असर पड़ने लगा। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के एलबीएस अस्पताल और एम्स रेफर किया गया। डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई। परिजनों के मुताबिक निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च एक करोड़ रुपये से अधिक बताया गया। सीमित आय वाले परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना संभव नहीं था। इसके बाद रितेश को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार देर शाम उसने दम तोड़ दिया। रितेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा है। दूसरी मौत ज्योलीकोट निवासी 26 वर्षीय नीमा जोशी की हुई। नीमा को सितंबर की शुरुआत में लिवर इंफेक्शन और पीलिया की गंभीर शिकायत हुई थी। हल्द्वानी में उपचार के बाद हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बरेली के राममूर्ति अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। नीमा के पीछे चार साल और डेढ़ साल की दो मासूम बेटियां रह गई हैं। परिवार के मुताबिक नीमा के घर के पांच अन्य सदस्य भी इस समय पीलिया से पीड़ित हैं। इससे पूरे परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जून से सामने आ रहे थे मामले, अब तक क्यों नहीं थमा संक्रमण?जून के अंतिम सप्ताह से क्षेत्र में डायरिया और टायफाइड के मामले सामने आने की बात कही जा रही है। ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट ने बीमारी के स्रोत और दूषित पेयजल को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि समय रहते संक्रमण के संभावित स्रोत पर प्रभावी कार्रवाई और ब्लीचिंग-क्लोरीनेशन की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए थी। अब पीलिया के गंभीर मामलों और दो मौतों के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता बढ़ाई गई है। दूषित पानी बना वजह या व्यवस्था की चूक?एक ही क्षेत्र में लगातार जलजनित बीमारी के मामले सामने आने के बाद पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर एक ही परिवार के कई सदस्यों के पीलिया से संक्रमित होने से दूषित पानी की आशंका और गहरा गई है। हालांकि संक्रमण के वास्तविक स्रोत की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com