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हल्द्वानी: गणपति बप्पा को किया प्रतिष्ठित, विसर्जन से किया इनकार

हल्द्वानी: गणेशोत्सव की धूम इस बार बद्रीपुरा में थोड़ी अलग रही। जहां देशभर में गणपति बप्पा का पारंपरिक विसर्जन किया जाता है, वहीं बद्रीपुरा गणेश महोत्सव समिति ने इस बार एक अनूठा फैसला लेकर बप्पा की प्रतिमा को विसर्जित करने के बजाय सुरक्षित रखने का निर्णय लिया। समिति पिछले 9 वर्षों से गणेश महोत्सव का आयोजन कर रही है। इस बार भी पूरे श्रद्धा भाव से पांच दिनों तक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान हुए। पांचवें दिन पूरे वार्ड-11 में गणपति बप्पा की प्रतिमा के साथ शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने नाचते-गाते हुए बप्पा की जयकार लगाएं। शोभायात्रा के बाद प्रतिमा का दूध-दही स्नान कराया गया, फूल अर्पित किए गए और फिर वार्ड के ही एक श्रद्धालु के घर में प्रतिमा को सुरक्षित स्थापित कर दिया गया। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड, जिसे देवभूमि कहा जाता है, हमेशा से देवी-देवताओं का निवास स्थान माना गया है। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में श्री गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव का यहां वास बताया गया है। समिति का मानना है कि उत्तराखंड की संस्कृति देवी-देवताओं का आह्वान कर उन्हें प्रतिष्ठित करने की रही है, ना कि उन्हें विसर्जित करने की।

समिति के अध्यक्ष ने कहा कि धर्मशास्त्रों में कहीं भी श्री गणेश प्रतिमा के विसर्जन का उल्लेख नहीं है। प्रतिमाओं का विसर्जन कर उन्हें नदियों और जलधाराओं में बहाना यहां की सांस्कृतिक आस्था के विपरीत है। देवभूमि में देवताओं को स्थापित किया जाता है और उन्हें पूजित रखा जाता है। उधर, रामनगर के श्री शिवेशवर महादेव मंदिर पीरुमदारा मंदिर के पुजारी हर्ष शर्मा ने बताया इस वर्ष गणपति की मूर्ति का विसर्जन ना करके पूजन के अंतिम दिन भव्य रूप से स्नान कराकर पुनः मंदिर में स्थापना की जाएगी। समिति के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल का कहना है की गणेश जी रिद्धि-सिद्धि के दाता है। प्रथम पूजनीय है। उत्तराखंड उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों है। पूजा अर्चना तो होनी ही चाहिए किंतु विसर्जन का कोई औचित्य नहीं है। श्री गणेश प्रतिमा विसर्जन की प्रथा को बंद करने की मांग को लेकर पहाड़ी आर्मी ने कुछ दिन पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था। संगठन का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड में देवी-देवताओं को प्रतिष्ठित करने की परंपरा रही है, विसर्जन करने की नहीं। पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत ने उस दौरान कहा था कि गणेश विसर्जन से सांस्कृतिक आस्था को ठेस पहुंच रही है। यदि सरकार ने इस प्रथा पर रोक नहीं लगाई तो संगठन को आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

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