
हल्द्वानी : कुमाऊं में बढ़ती टैक्स चोरी अब शासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पान मसाला, गुटखा, स्क्रैप, खाद्यान्न, मोबाइल और ईंट कारोबार में बिना बिल कारोबार और एमआरपी से अधिक वसूली के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने पूरे प्रदेश में टैक्स चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने और जीएसटी कमिश्नर को सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि यदि किसी विभागीय अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि शासन स्तर से कड़े संदेश जारी होने के बावजूद उधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के जिम्मेदार जीएसटी अधिकारी अब तक कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि लगातार शिकायतों और खुलासों के बाद भी विभागीय स्तर पर सख्ती दिखाई नहीं दे रही। सूत्रों के मुताबिक कुमाऊं में टैक्स चोरी का नेटवर्क अब संगठित “सिंडिकेट” का रूप ले चुका है। आरोप हैं कि इस पूरे खेल की कमान रुद्रपुर में तैनात एक जीएसटी अधिकारी के इशारों पर संचालित हो रही है, जिसके संरक्षण में करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है। यही वजह है कि विभागीय टीमों तक शिकायतें पहुंचने के बाद भी कार्रवाई लगभग शून्य बनी हुई है। हल्द्वानी समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट में मंगल पड़ाव, सब्जी मंडी, रामपुर रोड, रेलवे बाजार और टीपी नगर क्षेत्र के व्यापारियों ने दबी जुबान में कई गंभीर आरोप लगाए। व्यापारियों का कहना है कि टैक्स चोरी से जुड़े लोग इतने प्रभावशाली हैं कि उनके खिलाफ बोलने वाले कारोबारियों को डराया और धमकाया जाता है। वित्त सचिव के सख्त रुख और जीएसटी कमिश्नर को दिए गए निर्देशों के बाद अब निगाहें उधम सिंह नगर और नैनीताल के अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या शासन के आदेश सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेंगे या फिर कुमाऊं में सक्रिय टैक्स चोरी के इस कथित सिंडिकेट पर वास्तव में शिकंजा कसेगा।





