अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने को लेकर आबकारी विभाग के अधिकारी बने लाचार।

हल्द्वानी : उत्तराखंड में शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब शहर में खुलेआम बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई और होम डिलीवरी तक की जा रही है। दूसरी तरफ आबकारी विभाग सिर्फ दूरदराज क्षेत्रों में कच्ची शराब के पाउच पकड़कर अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, शहर के कई शराब ठेकों पर रात 11 बजे के बाद भी शटर बंद कर चोरी छिपे डेढ़ से दोगुनी कीमत पर शराब बेची जा रही है। इतना ही नहीं, सुबह निर्धारित समय से पहले भी बैक डोर से शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं। शहर में कम कीमत पर बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई और होम डिलीवरी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। सवाल यह है कि आखिर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा है? क्या आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं, या फिर सबकुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? शहर के कई बारों में आबकारी मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देर रात तक जाम छलक रहे हैं, लेकिन विभागीय टीमें कहीं नजर नहीं आतीं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और बयानबाजी हो रही है। जब इस पूरे मामले पर जिला आबकारी अधिकारी धीरेंद्र बिष्ट से बात की गई तो उन्होंने दावा किया कि जिले में कहीं भी नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है। लेकिन जब उनसे देर रात शराब बिक्री, ओवररेटिंग और बाहरी राज्यों की शराब की सप्लाई को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई के लिए शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से ठेके या बार का नाम बताकर सूचना देनी होगी, तभी विभाग कार्रवाई करेगा। इस बयान से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब आबकारी विभाग को किसी बार या ठेके का नाम बताया जाएगा, तभी वह कार्रवाई करेगा। आखिर विभाग की रूटीन चेकिंग और प्रवर्तन टीम अपनी जिम्मेदारी कब निभाएगी। क्या आबकारी विभाग इतना सक्षम भी नहीं है कि वह शहर के शराब के ठेकों और बार में रूटीन चेकिंग कर सके। कहीं न कहीं विभाग के अधिकारी प्रवर्तन कर्रवाई को लेकर लाचार नजर आ रहे हैं या वे किसी तरह का दबाव झेल रहे हैं।
