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होली में पारंपरिक साड़ी का महत्व, महिलाएं क्यों पहनती है सफेद साड़ियां

हल्द्वानी। हिन्दू धर्म में होली को अत्यधिक महत्वपूर्ण पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें महिलाओं की पारंपरिक होली की बात ही निराली है। यहां महिलाएं अपनी पारंपरिक कुमाऊंनी होली की साड़ी पहनकर खड़ी और बैठकी होली में हिस्सा लेती हैं। जिससे माहौल होलीमय हो जाता है। वहीं, महिलाओं में कुमाऊंनी होली की साड़ी उनकी सुंदरता में चार चांद लगा देता है।

होली पर आपने देखा होगा कि ज्यादातर लोग हलके रंग के कपड़े ही पहनते हैं। इसमें सफ़ेद रंग के कपड़ों की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है। होली की पारंपरिक कुमाऊंनी साड़ी होलियार महिलाओं की अब पहचान बन चुकी है। होली के त्योहार पर सफ़ेद कपड़े पहने जाते हैं, जहां महिलाएं सफ़ेद साड़ी या सफ़ेद सलवार सूट के साथ लाल दुपट्टा लेती हैं वहीं पुरुष ज्यादातर सफ़ेद कुर्ता पहनते हैं। सफ़ेद कपड़े पहनने के पीछे की ख़ास वजह यह है कि दरअसल, सफ़ेद रंग शांति का प्रतीक माना जाता है। होली के दिन लोग पुराने गीले-शिकवे भूलकर दोस्ती कर लेते हैं? ऐसे में माना जाता है कि सफ़ेद रंग पहनना दोस्ती बढ़ाने में मदद करता है, सफ़ेद रंग के कपड़ों पर कलर्स उभरकर दिखते हैं। इस वजह से भी होली में लोग सफ़ेद कपड़े पहनना पसंद करते हैं।

कुमाऊंनी होली में पारंपरिक परिधान का काफी महत्व है। अपनी संस्कृति को देखते हुए होलियार महिलाएं कुमाऊंनी वेशभूषा के अनुसार होली का वस्त्र धारण करती हैं। इससे पहाड़ी संस्कृति का प्रचार प्रसार भी हो जाता है। यह साड़ी खासकर होली के मौके पर पहनी जाती है। यह साड़ी मुख्यत लाल और सफेद रंग की होती है। इनमें सफेद साड़ी के ऊपर लाल रंग के बुरांस और गुलाब के फूल बने होते हैं। यह साड़ियां सिंथेटिक, सूती और सिल्क में बनाई जाती हैं।

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